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              * पत्रकार हूँ मैं ना जीवन की परवाह , ना मृत्यु का भय । सत्य के पथ पर चलता , सदा मैं निर्भय । क़लम और कैमरे को , बनाकर हथियार । नित करता , समाज की बुराइयों पर वार। दर्पण बनकर समाज का , मानव को दिखलाता । ना मेरी   दिवाली होती , ना मैं ईद मनाता । ख़तरा कितना भी हो चाहे , वही पहुँच जाता ।
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      कोरों ना योद्धाओं को नमन         हम जीत जाएँगे इस संकट विकट परिस्थिति में, जो नित नित सेवा करते है । अपने हित को भूलकर , जो मानव हित पर चलते है । दिन रात नही होती उनकी , हर पल तत्पर रहते है । धन्य है इनकी देशभक्ति , इनके कारण हम है सुरक्षित । हृदय से नमन है उनको , जीवन देते है जो जन जन को । डॉक्टर , नर्स ,पुलिस ,प्रशासन और सेना , ये है हमारे देश का गहना । क़र्ज़ इनका ना उतार पाएँगे , इन्ही के दम पर हम जीत जाएँगे ।                         । उपमा शर्मा 
------------------- सन 1965 से नर्स के सेवाभाव और उनके समर्पण को सम्मान देते हुए प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में यह दिवस मनाया जाता है ।अस्पताल में रोगियों या पीड़ितों की सेवा करने के लिए नर्सें होती हैं जब किसी मरीज को किसी प्रकार की दिक्कत होती है तो बेशक डॉक्टर उन्हें इलाज के लिए दवाइयां लिखता है लेकिन बिना नर्सों की सेवा भाव के मरीज कभी भी सहज नहीं हो पाता है। पूरी दुनिया में कोरोना से लड़ने में इनकी और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की बड़ी भूमिका है। नर्सिग दुनिया का सबसे ज्यादा सेवामयी पेशा है। क्योंकि, वह स्नेह और दुलार से रोगी की देखभाल करती है। स्वास्थ्य के प्रति नर्सो का योगदान कम नहीं है। हमारी चिकित्सा प्रणाली के लचीलेपन की सहजता को मजबूत बनाने में नर्सिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिस प्रकार एक मां अपने बीमार बच्चे की देखभाल करती है, ठीक उसी प्रकार नर्स मां के रूप में काम करती है। बस फर्क इतना है कि उन्हें मां की जगह सिस्टर कहने का प्रचलन है। एक नर्स मरीज की शारीरिक पीड़ा को अच्छी तरह समझ कर उन्हें बीमारियों से लड़ने का एक मानसिक जज्बा भी देती हैं। कोरोना जैसी महामारी जहां लोग स...

माँ का क़र्ज़*

  माँ का क़र्ज़*  ईश्वर का स्वरूप है माँ,  जननी है ,ममता का एक रूप है माँ। माँ की छवि में दिख जाए सारा जहाँ ,  चोट मुझे लगे तो दर्द सहे माँ। माँ है वो कुम्भकार , जो मिट्टी को दे स्वरूप ,आकार । अपने ही अंश से मुझको दुनिया में लायी ,  हर पीड़ा , हर दर्द सहा , पर मुझ पर आँच ना आयी । आँचल में अपने संभाला है जग को ,  ना हो कोई भी पीड़ा किसी को ,  जब दर्द हो तो आह निकले  मुँह से सबके माँ निकले। क़र्ज़ माँ के ना उतार पाएँगे ,  जन्म चाहे कितने भी पाएँगे । माँ से कोमल कोई हो नहीं पाएगा ,  रिश्ता ये ऐसा है कि भूला नहीं जाएगा ।  माँ ही है जीवन दाता  ईश्वर से बढ़कर है माँ का नाता । माँ के कारण ही दुनिया में आते है , माँ से ही तो हम मानव बन पाए है । विश्व में  चाहे कही भी चले जाओगे ,  माँ का स्थान सबसे ऊपर पाओगे ।  ख़ुद के अंश से वंश बढ़ाती ,  माँ ही तो है दुनिया सजाती ।